सुप्रीम
कोर्ट में उत्तर प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों की नियुक्तियों के विवाद के
मामले में सुनवाई बुधवार को पूरी हो गई। लेकिन अकादमिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों
की सुनवाई शुक्रवार को दो बजे होगी।
जस्टिस आदर्श गोयल और यू.यू.
ललित की अवकाशकालीन पीठ बुधवार को सवा चार बजे से सवा छह बजे तक बैठी थी। कोर्ट ने
इस दौरान शिक्षामित्रों के वकीलों की बहस सुनी। कोर्ट ने कहा कि जिसका कुछ छूट गया
है वह अपनी बहस लिखित में दे दें।
शिक्षामित्रों की ओर से वरिष्ठ
अधिवक्ता कोलिन गांसाल्विस और संजय त्यागी ने बहस की। उन्होंने दलील दी कि पश्चिम
बंगाल में ऐसे ही मामले में सभी शिक्षाबंधुओं को नियमित किया गया है। उन्होंने कहा
कि गांवों में स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षामित्रों की बेहद आवश्यकता है।
त्यागी ने कहा कि शिक्षामित्रों में सैकड़ों ऐसे उम्मीदवार हैं जो पूरी तरह से योग्य
हैं। उन्होंने टीईटी भी पास कर रखी है और बीएड भी। वे 72,000 शिक्षकों की भर्ती में भी पास हो गए
थे लेकिन उन्होंने ज्वाइन इसलिए नहीं किया क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें
शिक्षामित्र के रूप में समायोजित कर लिया था। ऐसे में उन्हें कैसे हटाया जा सकता
है।
दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के
अनिल यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और फैसला उनके पक्ष में ही
होगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर में चारों ओर शिक्षामित्र ही
शिक्षामित्र नजर आ रहे थे। उन्हें नियंत्रण में करने के लिए विशेष पुलिस बल लगाए
गए थे।
