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मुग़लों को हराकर मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले महाराज छत्रपति शिवाजी
अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं में से एक थे. आज से 343 साल पहले 6 जून 1674 को उनका राज्याभिषेक हुआ था. पढ़िए भवन सिंह राणा की किताब
छत्रपति शिवाजी के कुछ हिस्से और जानिए किन हालातों में हुआ था उनका राज्याभिषेक?
क्यों पड़ी राज्याभिषेक की ज़रूरत
भवन सिंह लिखते हैं कि 1674 से पहले शिवाजी सिर्फ एक स्वतंत्र शासक थे. उनका राज्याभिषेक नहीं हुआ था और आधिकारिक तौर पर साम्राज्य के शासक नहीं थे. शिवाजी ने कई लड़ाइयां जीतीं थीं लेकिन बतौर राजा उन्हें स्वीकार नहीं किया गया था.
उन्होंने माना कि अगर शासक बनना है तो जोर-शोर से राज्याभिषेक होना बेहद ज़रूरी है. इसके लिए उन्होंने अपने नज़दीकियों और गुरु से सलाह ली. उस दौर में कई मराठा सामंत ऐसे थे, जो शिवाजी को राजा मानने को तैयार नहीं थे. इन्हीं सब चुनौतियों पर काबू पाने के लिए उन्होंने राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू कीं.
क्यों पड़ी राज्याभिषेक की ज़रूरत
भवन सिंह लिखते हैं कि 1674 से पहले शिवाजी सिर्फ एक स्वतंत्र शासक थे. उनका राज्याभिषेक नहीं हुआ था और आधिकारिक तौर पर साम्राज्य के शासक नहीं थे. शिवाजी ने कई लड़ाइयां जीतीं थीं लेकिन बतौर राजा उन्हें स्वीकार नहीं किया गया था.
उन्होंने माना कि अगर शासक बनना है तो जोर-शोर से राज्याभिषेक होना बेहद ज़रूरी है. इसके लिए उन्होंने अपने नज़दीकियों और गुरु से सलाह ली. उस दौर में कई मराठा सामंत ऐसे थे, जो शिवाजी को राजा मानने को तैयार नहीं थे. इन्हीं सब चुनौतियों पर काबू पाने के लिए उन्होंने राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू कीं.
रूढ़िवादी
ब्राह्मणों ने किया विरोध
शिवाजी ने गद्दी संभालने की तैयारी कई महीने पहले 1673 से ही शुरू कर दीं थीं. लेकिन राज्याभिषेक से पूर्व उनके सामने एक बड़ी समस्या खड़ी थी. उस दौर के रूढ़िवादी ब्राह्मण, शिवाजी को राजा मानने के लिए तैयार नहीं थे. उनके मुताबिक क्षत्रिय जाति से ही कोई राजा बन सकता है.
भवन सिंह के मुताबिक शिवाजी भोंसले समुदाय से आते थे, जिसे मराठावाड़ में निचली जाति समझा जाता था. जबकि भोंसले दावा करते हैं कि वो सिसोदिया परिवार के वंशज हैं. इसका हल तलाशने के लिए शिवाजी ने एक दल क्षत्रियों से मिलने और सलाह लेने उदयपुर भेजा. साथ ही काशी के मशहूर भट्ट परिवार से भी वो दल मिला. वहां उनकी मुलाकात उस दौर के विद्वान गागा भट्ट से हुई. उन्होंने चुनौती स्वीकार की और शिवाजी का राज्याभिषेक कराने के लिए हामी भरी.
शुरू हुईं राज्याभिषेक की तैयारियां
गागा भट्ट ने मराठावाड़ के ब्राह्मणों को मनाया और शिवाजी के राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू करवाईं. इस समारोह में कई मशहूर शख्सियतें शामिल होने के लिए राजगढ़ पहुंची. इसके लिए देश के बड़े-बड़े पंडितों को बुलावा दिया गया.
कई हज़ार की संख्या में ब्राह्मण परिवार राजगढ़ शामिल होने के लिए पहुंचे. किताब के लेखक भवन सिंह लिखते हैं कि इस समारोह में 50 हज़ार से ज़्यादा लोग शामिल हुए थे. राज्याभिषेक में शामिल हुए लोगों ने 4 महीने, शिवाजी की मेहमान नवाज़ी में गुज़ारे. पंडित गागा भट्ट को लाने के लिए काशी विशेष दूत भेजे गए.
पहले विरोध करने वाले ब्राह्मण, गागा भट्ट के तर्कों से सहमत हुए और धूमधाम से शिवाजी के राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू हुईं.
पूरे रीति रिवाज़ से हुआ राज्याभिषेक
शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक पूरे वैदिक रीति-रिवाज़ों से हुआ. उन्होंने इसमें शामिल हुए सभी पंडितों और मेहमानों को उपहार दिए गए. इसके साथ मंत्रोचारण कर उन्हें राजा की वेशभूषा पहनाई गई. छत्रपति शिवाजी के अलावा उनके 8 अन्य मंत्रियों ने भी अपनी उपाधि ग्रहण की. इसके बाद हाथियों को सजा कर भव्य मार्च निकाला गया. शिवाजी उनमें से एक हाथी पर बैठकर राजगढ़ की सड़कों पर उतरे. जहां उनका जोर-शोर से स्वागत किया गया.
शिवाजी ने गद्दी संभालने की तैयारी कई महीने पहले 1673 से ही शुरू कर दीं थीं. लेकिन राज्याभिषेक से पूर्व उनके सामने एक बड़ी समस्या खड़ी थी. उस दौर के रूढ़िवादी ब्राह्मण, शिवाजी को राजा मानने के लिए तैयार नहीं थे. उनके मुताबिक क्षत्रिय जाति से ही कोई राजा बन सकता है.
भवन सिंह के मुताबिक शिवाजी भोंसले समुदाय से आते थे, जिसे मराठावाड़ में निचली जाति समझा जाता था. जबकि भोंसले दावा करते हैं कि वो सिसोदिया परिवार के वंशज हैं. इसका हल तलाशने के लिए शिवाजी ने एक दल क्षत्रियों से मिलने और सलाह लेने उदयपुर भेजा. साथ ही काशी के मशहूर भट्ट परिवार से भी वो दल मिला. वहां उनकी मुलाकात उस दौर के विद्वान गागा भट्ट से हुई. उन्होंने चुनौती स्वीकार की और शिवाजी का राज्याभिषेक कराने के लिए हामी भरी.
शुरू हुईं राज्याभिषेक की तैयारियां
गागा भट्ट ने मराठावाड़ के ब्राह्मणों को मनाया और शिवाजी के राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू करवाईं. इस समारोह में कई मशहूर शख्सियतें शामिल होने के लिए राजगढ़ पहुंची. इसके लिए देश के बड़े-बड़े पंडितों को बुलावा दिया गया.
कई हज़ार की संख्या में ब्राह्मण परिवार राजगढ़ शामिल होने के लिए पहुंचे. किताब के लेखक भवन सिंह लिखते हैं कि इस समारोह में 50 हज़ार से ज़्यादा लोग शामिल हुए थे. राज्याभिषेक में शामिल हुए लोगों ने 4 महीने, शिवाजी की मेहमान नवाज़ी में गुज़ारे. पंडित गागा भट्ट को लाने के लिए काशी विशेष दूत भेजे गए.
पहले विरोध करने वाले ब्राह्मण, गागा भट्ट के तर्कों से सहमत हुए और धूमधाम से शिवाजी के राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू हुईं.
पूरे रीति रिवाज़ से हुआ राज्याभिषेक
शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक पूरे वैदिक रीति-रिवाज़ों से हुआ. उन्होंने इसमें शामिल हुए सभी पंडितों और मेहमानों को उपहार दिए गए. इसके साथ मंत्रोचारण कर उन्हें राजा की वेशभूषा पहनाई गई. छत्रपति शिवाजी के अलावा उनके 8 अन्य मंत्रियों ने भी अपनी उपाधि ग्रहण की. इसके बाद हाथियों को सजा कर भव्य मार्च निकाला गया. शिवाजी उनमें से एक हाथी पर बैठकर राजगढ़ की सड़कों पर उतरे. जहां उनका जोर-शोर से स्वागत किया गया.
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