Wednesday, June 28, 2017

योगी सरकार के सौ दिनः शिक्षा में सुधार को अभी कई और इम्तिहान

लखनऊ (जेएनएन)। सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार को अपनी सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शुमार बताया था। शैक्षिक क्षेत्र में सुधार के मकसद से योगी सरकार ने बीते 100 दिनों में कई बड़े एलान और फैसले किये, अपने लिए कई लक्ष्य भी निर्धारित किये लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए इन वादों और घोषणाओं को अमली जामा पहनाने के लिए सरकार को कई इम्तिहान से गुजरना होगा।
भाजपा के संकल्प पत्र पर अमल करते हुए योगी सरकार ने परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को किताबें व नयी यूनिफॉर्म के साथ जूते-मोजे भी उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ा दिये हैं लेकिन जुलाई में स्कूल खुलने पर समय से बच्चों को इन्हें मुहैया करा पाना सरकार के लिए चुनौती है। पांच वर्षों के दौरान परिषदीय विद्यालयों के छात्र नामांकन में 23 लाख की गिरावट और प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में मानक के आधार पर 65 हजार से अधिक शिक्षकों के सरप्लस पाये जाने पर सरकार ने शिक्षकों की भर्ती के लिए उप्र बेसिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के गठन का अपना इरादा त्याग दिया है।
उपलब्ध छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण के लिए सरकार ने परिषदीय शिक्षकों के लिए स्थानांतरण नीति तो जारी कर दी लेकिन इस पर मंशा के अनुरूप अमल करना कठिन चुनौती होगी। परिषदीय स्कूलों के सभी बच्चों का आधार नामांकन कराना योगी सरकार के पहले 100 दिन के एजेंडे में शुमार था लेकिन इसकी प्रगति कतई संतोषजनक नहीं है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना भी सरकार के 100 दिनों के लक्ष्य में शामिल था लेकिन इस सिलसिले में 31569 आवेदन पत्र निस्तारण के लिए लंबित हैं।

माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए राजकीय बालक हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में बालिकाओं के दाखिले का एलान कर दिया है। वहीं बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिहाज से सरकार ने अगले सत्र से यूपी बोर्ड के टॉपर्स की कापियां सार्वजनिक करने की घोषणा की है। यूपी बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सरकार ने अगली बार से सिर्फ उन्ही विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने का इरादा जताया है जिनमें सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। सरकार इसमें कितना कामयाब होती है, निगाहें इस पर भी लगी होंगी।
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की बेतरतीब तैनाती से निजात पानेे के लिए सरकार ने स्थानांतरण नीति पर मुहर लगायी है लेकिन इस पर कितनी ईमानदारी से अमल होता है, यह भी गौर करने वाली बात होगी। निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने विधेयक लाने की दिशा में कदम पढ़ा दिये हैं। देखना होगा कि सरकार अपने मंसूबे में कितना कामयाब होगी। अलबत्ता माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैैक्षिक सत्र में 220 दिनों की पढ़ाई का शैक्षिक पंचांग जरूर सौ दिन के अंदर जारी कर दिया।

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार ने कुलपतियों की बैठक बुलाने की मंशा जतायी है लेकिन अभी तक इसकी तारीख तय नहीं हो पायी है। शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतों के लिए राज्य शैक्षिक अधिकरण के गठन पर शासन ने सहमति तो जतायी है लेकिन इसे कागज से हकीकत में तब्दील करने की परीक्षा भी सरकार को पास करनी होगी। 


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