बीटीसी 2016-17 सत्र की प्रवेश प्रक्रिया सोमवार को
शुरू हो गई। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) की 10500 और 1472 निजी कॉलेजों की 73600 सीटों
यानी कुल 84100
सीटों पर प्रवेश के लिए
शासनादेश जारी हो गया है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से मंगलवार को ऑनलाइन
आवेदन समेत प्रवेश तक का विस्तृत कार्यक्रम जारी होने की उम्मीद है।
संबद्धता में देरी के कारण इस
बार तकरीबन 1800
प्राइवेट कॉलेजों को प्रवेश
प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। इस प्रकार लगभग 90 हजार सीटें कम हो गई हैं। 2016-17 सत्र के
प्रवेश में महिला-पुरुष और विज्ञान-कला की बाध्यता भी खत्म कर दी गई है। इसके चलते
प्रवेश में दिक्कत हो रही थी। बेसिक शिक्षा परिषद की अध्यापक सेवा नियमावली में
ऐसी बाध्यता नहीं होने के कारण इसे हटा दिया गया है। इसका फायदा उन छात्रों को
होगा जिनका प्रवेश अधिक मेरिट होने के बावजूद लिंग या विषय की अनिवार्यता के कारण
नहीं हो पाता था।
नियमित नहीं हो पा रहा बीटीसी
का सत्र
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के
बावजूद बीटीसी का सत्र नियमित नहीं हो पा रहा है। बाबा शिवनाथ सिंह शिक्षक एवं
प्रशिक्षण संस्थान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर 2015 को उत्तर
प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि बीटीसी का सत्र नियमित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट
के आदेश पर 2015-16
सत्र 22 सितंबर 2016 से शुरू
हो गया। लेकिन 2016-17
की प्रक्रिया शुरू होने में
देरी हो गई। ऐसे में 2016-17 की
कक्षाएं ही एक जुलाई से शुरू हो जाए तो बड़ी बात है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के
अनुसार 2017-18
की कक्षाएं एक जुलाई से शुरू
होनी चाहिए। इस लिहाज से प्रवेश प्रक्रिया सालभर देरी से चल रही है।
जल्द बदल जाएगा नाम, बोर्ड ले चुका निर्णय
बीटीसी का नाम जल्द ही डिप्लोमा
इन एलिमेंटरी एजुकेशन या डीएलएड हो जाएगा। बेसिक शिक्षा परिषद की पिछले दिनों
सीमैट में हुई बैठक में एनसीटीई के निर्देश के अनुसार नाम बदलने पर सहमति बन चुकी
है। शासनादेश जारी होने के बाद नाम बदल जाएगा।

