Friday, June 9, 2017

समायोजित होंगे राजकीय इंटर कालेज के सरप्लस शिक्षक


'सरप्लस शिक्षकों' से पूरी की जाएगी कॉलेजों में ‌टीचर्स की कमी
राजकीय इंटर कॉलेजों में सरप्लस शिक्षकों को अब उन विद्यालयों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की कमी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस से 12 जून तक राजकीय इंटर कॉलेजों में छात्र संख्या के अनुपात से ज्यादा प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों का ब्योरा मांगा है। ब्योरा मिलने के बाद सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे राजकीय इंटर कॉलेज हैं, जहां छात्रों के अनुपात से अधिक प्रवक्ता और सहायक शिक्षक कार्यरत हैं। विभाग ने छात्रों के अनुपात से अधिक शिक्षकों को सरप्लस मानते हुए ऐसे कॉलेजों में भेजने का निर्णय लिया है, जहां विद्यार्थियों के अनुपात में शिक्षक कम है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस से कक्षा 6 से 10 की छात्र संख्या के अनुपात में सहायक अध्यापक और कक्षा 11 से 12 के छात्र संख्या के अनुपात में प्रवक्ताओं की जरूरत का आंकलन कर सरप्लस सहायक शिक्षकों और प्रवक्ताओं का ब्योरा 12 जून तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को 13 जून को प्रस्तावित बैठक में सरप्लस शिक्षकों का रिकॉर्ड लेकर उपस्थित होने को कहा गया है।

ये होगा मापदंड


प्रधानाचार्य को सप्ताह में 12 पीरियड लेने हैं। इंटरमीडिएट कक्षाओं के अध्यापकों को 30 पीरियड प्रति सप्ताह तथा अन्य शिक्षकों को 36 पीरियड प्रति सप्ताह अध्यापन करना है। अगर इंटर की कक्षाओं में एक प्रवक्ता के लिए दो पीरियड नियत हैं तो उन्हें कक्षा 6 से 10 की कक्षाओं में प्रतिदिन 3 पीरियड पढ़ाने होंगे।

प्रवक्ता के कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों को पढ़ाने से सहायक अध्यापक के कार्य की पूर्ति होगी। इससे सहायक अध्यापक को सरप्लस घोषित माना जाएगा। इसी के अनुसार सरप्लस शिक्षकों की गणना की जाएगी।

शहरी क्षेत्रों में सर्वाधिक सरप्लस शिक्षक
शहरी क्षेत्रों के राजकीय इंटर कॉलेजों में सर्वाधिक सरप्लस सहायक अध्यापक और प्रवक्ता कार्यरत हैं। इंटर कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम होने के बाद भी राजनीतिक दबाव में सहायक अध्यापक और प्रवक्ता विद्यार्थी संख्या के अनुपात से कई गुना ज्यादा तैनात हैं।

छात्र संख्या से अधिक शिक्षकों को सरप्लस करने से सर्वाधिक गाज शहरी क्षेत्रों के शिक्षकों पर गिरेगी, उन्हें अब ग्रामीण क्षेत्रों के राजकीय इंटर कॉलेजों में नौकरी करनी होगी।



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